इस्लामी रिवायात में इफ़्तार के बहुत सारे आदाब बयान किए गए है जैसा कि इमाम मूसा काज़िम अ.स. ने अपने अजदाद से नक़्ल किया है कि रोज़ेदार की इफ़्तार के समय की एक दुआ ज़रूर क़ुबूल होती है, इसलिए जब पहला निवाला उठाओ तो बिस्मिल्लाहि या वासेअल-मग़फ़ेरह इग़फ़िर ली कहो।
हदीस की रौशनी में कुछ आदाब को आपके लिए यहां बयान कर रहे हैं....
मग़रिब की नमाज़ पढ़ कर इफ़्तार करना
इमाम सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि अगर रोज़ेदार के जिस्म में ताक़त बाक़ी हो तो मुसतहब है कि वह मग़रिब की नमाज़ के बाद रोज़ा इफ़्तार करे, इसी तरह इमाम बाक़िर अ.स. ने फ़रमाया अगर तुम्हारी भूख नमाज़ में दिल लगाने से रोक रही हो तो पहले इफ़्तार करो, इसी तरह एक दूसरी हदीस में फ़रमाया माहे रमज़ान में पहले नमाज़ पढ़ो फिर इफ़्तार करो मगर यह कि उन लोगों के साथ हो जो इफ़्तार का इंतेज़ार कर रहे हों।
इन हदीसों की रौशनी में इफ़्तार से पहले नमाज़ पढ़ने का मुसतहब होना उन दो लोगों को शामिल नहीं होता जो अपनी भूख प्यास को अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता हो और दूसरे वह जिसका इफ़्तार के लिए लोग इंतेज़ार कर रहे हों।
इफ़्तार के समय की दुआ पढ़ना
बहुत सारी दुआएं इफ़्तार के समय की बयान हुई हैं जिनको शैख़ अब्बास क़ुम्मी ने मफ़ातीहुल जेनान में ज़िक्र किया है लेकिन हम यहां पर इमाम रज़ा अ.स. की हदीस की तरफ़ इशारा करेंगे कि आपने फ़रमाया कि जो भी इफ़्तार के समय अल्लाहुम्मा लका सुम्ना बेतौफ़ीक़ेका व अला रिज़्क़ेका अफ़्तरना बेअमरेका फ़तक़ब्बलहु मिन्ना वग़फ़िर लना इन्नका अन्तल ग़फ़ूर अल-रहीम पढ़ेगा अल्लाह उसके रोज़े में पाई गई कमियों को माफ़ कर देगा।
ला इलाहा इल्लल्लाह कहना
इमाम सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि जो शख़्स अपने रोज़े को नेक बातों और नेक अमल के साथ तमाम करेगा अल्लाह उसके रोज़े को क़ुबूल करेगा, किसी ने सवाल किया कि नेक बातों और नेक अमल से क्या मुराद है? तो आपने फ़रमाया ला इलाहा इल्लल्लाह नेक बातों में से है और नेक अमल अपने माल से फ़ितरा देना है।
इफ़्तार में गर्म पानी खजूर और दूध का इस्तेमाल
इसी तरह मासूमीन अ.स. से नक़्ल होने वाली हदीसों में इफ़्तार में गर्म पानी, खजूर और दूध के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया, जैसा कि पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमाया जो शख़्स हलाल पैसों की खजूर से इफ़्तार करे तो उसकी नमाज़ का सवाब 400 गुना बढ़ जाएगा।
इमाम सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि पैग़म्बर स.अ. इफ़्तार के लिए सबसे पहले जिस चीज़ का इस्तेमाल करते थे वह खजूर थी, अगर खजूर नहीं मिल सकी तो किसी मीठी चीज़ से इफ़्तार करते थे और अगर कोई मीठी चीज़ न हुई तो गर्म पानी से इफ़्तार करते थे।
गर्म पानी से इफ़्तार के बारे में इमाम सादिक़ अ.स. से हदीस नक़्ल हुई है कि आपने फ़रमाया कि पानी से इफ़्तार करने से इंसान के दिल के गुनाह धुल जाते हैं।
पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमया गर्म पानी इंसान के मेदे और लीवर को साफ़ रखता है और मुंह से बदबू का दूर करता है, दांतों और आंखों को मज़बूत बनाता है, आंखों की रौशनी को बढ़ाता और गुनाहों को कम करता और सर के दर्द को ख़त्म कर देता है।
सूरए क़द्र की तिलावत करना
इमाम सज्जाद अ.स. ने फ़रमाया कि जो शख़्स सहरी और इफ़्तारी से पहले सूरए क़द्र पढ़े उसका सवाब उस शख़्स जैसा है जो अल्लाह की राह में ज़ख़्मी हुआ हो।
बिस्मिल्लाह पढ़ना और दुआ करना
इमाम मूसा काज़िम अ.स. अपने अजदाद से नक़्ल करते हुए फ़रमाते हैं कि रोज़ेदार की इफ़्तार के समय की जाने वाली एक दुआ मौजूद है, इसलिए जैसे ही पहला निवाला खाओ और बिस्मिल्लाह या वासेअल-मग़फ़ेरह इग़फ़िर ली पढ़ो।
एक दूसरी जगह फ़रमाते हैं कि जो भी इफ़्तार के समय बिसमिल्लाहिर रहमानिर रहीम पढ़े अल्लाह उसके गुनाहों को माफ़ कर देगा।